नई दिल्ली। वैश्विक आर्थिक संकेतों और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग के बीच सोने-चांदी की कीमतों में बुधवार को जोरदार उतार-चढ़ाव देखने को मिला। घरेलू सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत 6,600 रुपये की तेजी के साथ 2.67 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। वहीं सोना 690 रुपये चढ़कर 1.61 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ।
हालांकि, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर रुझान अलग रहा। यहां चांदी 3,764 रुपये की गिरावट के साथ 2.61 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई, जबकि सोना 1,590 रुपये फिसलकर 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे स्पष्ट है कि स्पॉट और वायदा बाजार में निवेशकों की रणनीति अलग-अलग बनी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का रुख
ग्लोबल मार्केट में भी कीमती धातुओं में मजबूती दर्ज की गई। स्पॉट गोल्ड करीब 0.48% की बढ़त के साथ 5,202 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा। वहीं स्पॉट सिल्वर लगभग 0.96% चढ़कर 88.25 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले दोनों धातुओं में चार दिनों की तेजी के बाद करीब 1.6% तक की गिरावट आई थी।
क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ?
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में तत्काल कटौती की संभावना कम होने से बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। बोस्टन फेड की अध्यक्ष सुसान कॉलिन्स ने संकेत दिया है कि मजबूत श्रम बाजार के चलते ब्याज दरें फिलहाल स्थिर रह सकती हैं।
जनवरी बैठक के मिनट्स से भी स्पष्ट हुआ है कि फेड अधिकारी दरों में जल्दबाजी में कटौती के पक्ष में नहीं हैं। ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर सोना-चांदी जैसे गैर-ब्याज वाले निवेश साधनों की मांग को सीमित करती हैं, लेकिन भू-राजनीतिक जोखिम इन पर समर्थन बनाए हुए हैं।
टैरिफ और वैश्विक तनाव का असर
अमेरिका में टैरिफ नीतियों को लेकर असमंजस और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने सुरक्षित निवेश की मांग को मजबूती दी है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा व्यापार समझौतों को लेकर सख्त रुख की चेतावनी के बाद बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है।
वहीं अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा आपातकालीन टैरिफ को खारिज किए जाने के बाद लॉजिस्टिक्स कंपनी फेडएक्स ने रिफंड की मांग को लेकर मुकदमा दायर किया है। इसके समानांतर कुछ वस्तुओं पर 10% नया टैरिफ लागू किए जाने से वैश्विक व्यापार और कमोडिटी बाजार पर दबाव बरकरार है।
आगे की दिशा
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक ब्याज दरों और वैश्विक व्यापार नीति को लेकर स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, तब तक सोने-चांदी में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। अल्पकाल में सुरक्षित निवेश की मांग कीमतों को सहारा दे सकती है, जबकि मजबूत डॉलर और ऊंची दरें दबाव बना सकती हैं।
