नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि फिल्म निर्माण अपने आप में जोखिम भरा व्यवसाय है, जहां हर प्रोजेक्ट के सफल होने की कोई गारंटी नहीं होती। अदालत ने इस टिप्पणी के साथ एक फिल्म निर्माता के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी के आपराधिक मामले को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने साफ किया कि धोखाधड़ी का मामला तभी बनता है, जब शुरुआत से ही किसी को ठगने की नीयत साबित हो। केवल निवेश की रकम वापस न मिलना या चेक बाउंस होना, अपने आप में आपराधिक इरादे का प्रमाण नहीं है। इस फैसले के साथ अदालत ने मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को पलट दिया।
यह मामला फिल्म निर्माता वी. गणेशन से जुड़ा था, जिन्होंने एक व्यक्ति से फिल्म निर्माण के लिए निवेश लिया था। समझौते के तहत निवेशक को मुनाफे में हिस्सेदारी देने की बात तय हुई थी। बाद में निवेश राशि बढ़ाई गई, लेकिन फिल्म रिलीज होने के बाद भी निवेशक को कोई रिटर्न नहीं मिला।
निर्माता द्वारा दिए गए पोस्टडेटेड चेक भी बाउंस हो गए, जिसके बाद निवेशक ने धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए आपराधिक मामला दर्ज कराया।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिल्म बनना और रिलीज होना यह दिखाता है कि शुरुआत में धोखा देने की मंशा नहीं थी। ऐसे मामलों को आपराधिक नहीं बल्कि सिविल विवाद माना जाना चाहिए, जहां निवेशक कानूनी उपायों के जरिए अपनी रकम की वसूली कर सकता है।
