Ola Scooter Case India: ठाणे के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने ओला इलेक्ट्रिक के खिलाफ एक अहम फैसला सुनाते हुए कंपनी की सर्विस पर कड़ी टिप्पणी की है। आयोग ने इसे गंभीर सेवा कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार मानते हुए कंपनी को ग्राहक को राहत देने का निर्देश दिया है।
मामला नवी मुंबई के एक वकील से जुड़ा है, जिन्होंने जुलाई 2024 में करीब 96,997 रुपये खर्च कर ओला का इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदा था। हालांकि, खरीद के कुछ ही दिनों के भीतर स्कूटर में तकनीकी खामियां सामने आने लगीं। पहली लंबी यात्रा के दौरान ही स्कूटर की स्पीड में दिक्कत आई और वह कई बार चलते-चलते बंद हो गया।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब अगस्त 2024 में सफर के दौरान स्कूटर की बैटरी अचानक तेजी से गिर गई और वाहन बीच सड़क पर रुक गया। ग्राहक ने इसे बेहद खतरनाक बताते हुए कंपनी से कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
लंबे समय तक शिकायतों के बावजूद समाधान न मिलने पर ग्राहक को सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़ा। इसके बाद कंपनी ने स्कूटर को सर्विस के लिए लिया, लेकिन सर्विस प्रक्रिया में भी कई अनियमितताएं सामने आईं। स्कूटर महीनों तक वापस नहीं किया गया और जब लौटाया गया, तो उसकी हालत भी खराब पाई गई।
सुनवाई के दौरान ओला की ओर से कोई प्रतिनिधि पेश नहीं हुआ, जिसके बाद आयोग ने एकतरफा फैसला सुनाया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि कंपनी ग्राहक को उसी मॉडल का नया स्कूटर दे। यदि ऐसा संभव न हो तो ग्राहक को पूरी राशि 6% वार्षिक ब्याज के साथ वापस की जाए।
इसके अलावा, मानसिक तनाव के लिए 20,000 रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 15,000 रुपये अतिरिक्त भुगतान करने का भी आदेश दिया गया है। यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
