देहरादून – उत्तराखंड में बहुप्रतीक्षित चारधाम यात्रा को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। इस वर्ष यात्रा को अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए कई अहम बदलाव किए गए हैं। यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल से गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ होगी, जबकि 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के द्वार खुलते ही यात्रा पूरी तरह शुरू हो जाएगी।
राज्य सरकार ने देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। अब तक करीब 17 लाख से अधिक तीर्थयात्री ऑनलाइन पंजीकरण कर चुके हैं, जिससे इस बार भी रिकॉर्ड संख्या में यात्रियों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
इस बार सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए धामों में प्रतिदिन दर्शन की अधिकतम सीमा को हटा दिया है। पहले भीड़ नियंत्रण के लिए तय संख्या लागू थी, लेकिन अब सभी पंजीकृत श्रद्धालुओं को दर्शन का अवसर देने की योजना बनाई गई है।
वहीं, बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में मंदिर की गरिमा बनाए रखने के लिए मोबाइल फोन के उपयोग पर सख्ती की गई है। दर्शन के दौरान फोन ले जाने और मंदिर परिसर में फोटो-वीडियो बनाने पर पूरी तरह रोक रहेगी। श्रद्धालुओं के लिए क्लॉक रूम की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
इसके अलावा, विशेष पूजा के शुल्क में भी वृद्धि की गई है। बदरीनाथ धाम में श्रीमद्भागवत कथा के लिए अब एक लाख रुपये और केदारनाथ में पूरे दिन की पूजा के लिए 51 हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष पूजाएं रात के समय आयोजित की जाएंगी, जबकि दिन में सामान्य दर्शन जारी रहेंगे।
चारधाम यात्रा राज्य की अर्थव्यवस्था का अहम आधार मानी जाती है। सरकार का लक्ष्य है कि हर श्रद्धालु को सुरक्षित, सुगम और यादगार यात्रा अनुभव मिले, ताकि देवभूमि की सकारात्मक छवि देश-दुनिया में और मजबूत हो सके।
