देहरादून- उत्तराखंड में लगातार ठंडे मौसम और ग्लेशियरों के अपेक्षित रूप से नहीं पिघलने का असर अब बिजली उत्पादन पर भी दिखाई देने लगा है। उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) को इस बार गर्मियों के मौसम में भी सामान्य स्तर तक बिजली उत्पादन बढ़ाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
आमतौर पर मई-जून के दौरान ग्लेशियर पिघलने से नदियों का जलस्तर बढ़ जाता है, जिससे जल विद्युत परियोजनाओं में बिजली उत्पादन तेजी पकड़ता है। लेकिन इस बार पहाड़ों में लंबे समय तक ठंड और बर्फबारी बने रहने से नदियों में पानी का प्रवाह सामान्य से कम है। इसका सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ा है।
स्थिति यह है कि जिन दिनों में यूजेवीएनएल का उत्पादन 1.9 से 2.2 करोड़ यूनिट प्रतिदिन तक पहुंच जाता था, वहीं अब उत्पादन 1.2 से 1.3 करोड़ यूनिट के बीच ही सीमित है। हालांकि पिछले महीने तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी होने पर उत्पादन करीब 1.5 करोड़ यूनिट तक पहुंचा था।
यूजेवीएनएल के प्रबंध निदेशक एके सिंह ने बताया कि पर्वतीय क्षेत्रों में अभी भी मौसम अपेक्षाकृत ठंडा बना हुआ है। इसी वजह से ग्लेशियर तेजी से नहीं पिघल रहे और नदियों का जलस्तर नहीं बढ़ पा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि 15 मई के बाद तापमान बढ़ने पर बिजली उत्पादन में सुधार देखने को मिल सकता है।