नई दिल्ली- वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक दबावों के बीच बुधवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रही। शुरुआती कारोबार में ही बाजार पर बिकवाली हावी दिखी, जिसका प्रमुख कारण रुपये की कमजोरी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें रहीं। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा गिरकर 96.88 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई।
विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी तनाव, खासकर पश्चिम एशिया की स्थिति, ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर रही है। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है, जो 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। इससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर दबाव बढ़ रहा है। बाजार विश्लेषक अजय बग्गा का कहना है कि महंगे तेल, बढ़ते चालू खाता घाटे और रुपये की गिरावट ने बाजार की धारणा को कमजोर किया है।
इसके अलावा, कमजोर मानसून के अनुमान और बढ़ती बॉन्ड यील्ड भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। इससे आने वाले समय में कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। वैश्विक स्तर पर भी महंगाई बढ़ने से अमेरिका, यूरोप और एशिया के बाजारों में दबाव देखा जा रहा है।
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो लगभग सभी प्रमुख सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। ऑटो, एफएमसीजी, मीडिया, मेटल, बैंकिंग और रियल्टी सेक्टर में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की नजर अब कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजों पर टिकी हुई है, जिनसे बाजार की आगे की दिशा तय हो सकती है।
एशियाई बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। जापान, हांगकांग, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया के प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए, जिससे वैश्विक निवेश माहौल सतर्क बना हुआ है।