नई दिल्ली- भारतीय शेयर बाजार के लिए सप्ताह का पहला कारोबारी दिन भारी निराशा और बिकवाली लेकर आया। वैश्विक स्तर पर नकारात्मक संकेतों, विदेशी निवेशकों की मुनाफावसूली और मध्य पूर्व में गहराते तनाव के कारण दलाल स्ट्रीट पर ‘रिस्क-ऑफ’ (जोखिम से बचने) का माहौल हावी रहा। इस सुनामी में भारतीय सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी बुरी तरह टूट गए।
सेंसेक्स, निफ्टी और रुपये का हाल
बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव साफ नजर आने लगा था:
सेंसेक्स (Sensex): बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का प्रमुख इंडेक्स दिन के कारोबार में 700 अंकों से ज्यादा गोता लगाने के बाद अंततः 645.51 अंक (-0.86%) के भारी नुकसान के साथ 73,597.83 के स्तर पर बंद हुआ।
निफ्टी (Nifty): नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 199.80 अंक (-0.86%) टूटकर 23,166.90 पर आ गया। दबाव इतना ज्यादा था कि निफ्टी कुछ समय के लिए 23,150 के मनोवैज्ञानिक स्तर को भी तोड़कर नीचे चला गया था।
रुपया (Rupee): विदेशी बाजारों में डॉलर की मजबूती और आर्थिक अनिश्चितता के कारण रुपया 17 पैसे कमजोर होकर डॉलर के मुकाबले 95.35 के स्तर पर आ गया।
सेक्टरवार प्रदर्शन: आईटी और मेटल सबसे बड़े लूजर बाजार में चौतरफा गिरावट के कारण आईटी, ऑटो, मेटल और रियल्टी सेक्टर्स में निवेशकों ने जमकर मुनाफावसूली की। हालांकि, इस गिरते बाजार में फार्मा, हेल्थकेयर और मीडिया जैसे ‘डिफेंसिव’ सेक्टर्स ने हल्की बढ़त के साथ बाजार को थोड़ा सहारा देने की कोशिश की।
शेयर बाजार के धराशायी होने के 3 मुख्य कारण:
भू-राजनीतिक तनाव और महंगा कच्चा तेल: पश्चिम एशिया में बढ़ते विवाद ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के अनुसार, लेबनान विवाद के बाद इजरायल-ईरान के बीच मिसाइल हमलों से स्थिति बिगड़ी है। इसके चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल 3.51% उछलकर 96.36 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। राहत की बात केवल इतनी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों पक्षों से तनाव कम कर शांति वार्ता पर लौटने की अपील की है।
एआई (AI) रैली का अंत और टेक शेयरों में बिकवाली: अमेरिकी बाजार में एआई शेयरों का खुमार टूटता दिख रहा है। शुक्रवार को नैस्डैक 4.18% गिर गया था। लिवलॉन्ग वेल्थ के हरिप्रसाद के. के मुताबिक, इसका सबसे बुरा असर एशियाई टेक बाजारों पर पड़ा है। दक्षिण कोरिया के ‘कोस्पी’ इंडेक्स में लगभग 8% की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसके कारण वहां ट्रेडिंग तक रोकनी पड़ी।
विदेशी निवेशकों (FII) की निकासी: शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 8,776.25 करोड़ रुपये के शेयरों की भारी बिकवाली की थी, जिसने सोमवार को भारतीय बाजार के सेंटीमेंट को और कमजोर कर दिया।
ग्लोबल मार्केट में भी पसरा सन्नाटा गिरावट सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही। एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई 225 (-4.2%), टोपिक्स (-2.7%), हांगकांग का हैंग सेंग (-1.3%) और चीन का शंघाई कंपोजिट (-1%) लाल निशान में बंद हुए। वहीं, यूरोपीय बाजारों में भी सुस्ती छाई रही और यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स में 1.1% की गिरावट देखी गई।
एक्सपर्ट्स की सलाह: विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर स्थिरता नहीं आती, निवेशकों को इस अस्थिर माहौल में बेहद सावधानी और समझदारी के साथ ट्रेड करना चाहिए।