दिल्ली- दिल्ली के ओखला क्षेत्र में स्थित कूड़ा निस्तारण स्थल पर काम करने वाले मजदूरों की स्थिति को लेकर एक अध्ययन में गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्षों से जमा कचरे के बीच काम कर रहे श्रमिक लगातार स्वास्थ्य जोखिमों का सामना कर रहे हैं, जबकि उनकी सुरक्षा और सुविधाओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।
अध्ययन में बताया गया है कि इस स्थल पर भारी मात्रा में पुराना कचरा अब भी मौजूद है, जो समय के साथ एक बड़े ढेर का रूप ले चुका है। यहां काम करने वाले मजदूरों में त्वचा रोग, सांस से जुड़ी परेशानियां, आंखों में जलन और अन्य बीमारियां आम हो गई हैं। अधिकतर श्रमिकों ने स्वीकार किया कि उन्हें नियमित रूप से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि मजदूरों के लिए बुनियादी सुविधाएं बेहद खराब हैं। आराम करने के स्थान और शौचालय गंदगी से भरे हैं और साफ पानी की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं है। कचरे से निकलने वाले जहरीले तरल के प्रबंधन की भी कमी बताई गई है, जिससे आसपास के इलाकों पर खतरा बढ़ जाता है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, कचरे के निस्तारण के लिए कुछ प्रयास जरूर किए गए हैं, जैसे मशीनों के जरिए पुराने कचरे को हटाने की प्रक्रिया, लेकिन इसका लाभ मजदूरों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाया है। वहीं, सुरक्षा उपकरण दिए जाने के बावजूद उनकी गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं, जिससे श्रमिकों को पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल पा रही।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि कचरे को स्रोत पर अलग करने की व्यवस्था मजबूत की जाए, मजदूरों को बेहतर सुरक्षा उपकरण और नियमित स्वास्थ्य जांच उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, साइट पर साफ-सफाई, लीचेट ट्रीटमेंट और श्रमिकों के लिए बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करने की जरूरत बताई गई है, ताकि उनके स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों की सुरक्षा हो सके।
