नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने विकलांग व्यक्तियों के लिए बीमा योजनाओं को अधिक संवेदनशील और न्यायसंगत बनाने के मुद्दे पर अहम कदम उठाया है। कोर्ट ने इस संबंध में दाखिल याचिका पर केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) से जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति देते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
याचिका में मांग की गई है कि एलआईसी को अपनी कल्याणकारी बीमा योजनाओं, विशेष रूप से ‘जीवन आधार’ पॉलिसी के तहत, विकलांग व्यक्तियों के लिए विशेष दिशानिर्देश तैयार करने और उन्हें लागू करने के निर्देश दिए जाएं। इसमें यह भी कहा गया है कि केंद्र सरकार ऐसी योजनाओं की निगरानी सुनिश्चित करे, ताकि वे संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के अनुरूप हों।
याचिकाकर्ता ने यह भी आग्रह किया है कि बौद्धिक, मानसिक और जन्मजात अक्षमताओं से जूझ रहे लाभार्थियों के बीमा दावों का निपटारा मानवीय और तर्कसंगत तरीके से किया जाए। साथ ही, एलआईसी को ऐसी व्यवस्था बनाने के निर्देश देने की मांग की गई है, जिसमें ‘जीवन आधार’ योजना के तहत विकलांग व्यक्तियों को निश्चित आयु के बाद वार्षिकी (पेंशन जैसी सुविधा) मिल सके।
