नई दिल्ली- देशभर में गहन चिकित्सा सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को आईसीयू (ICU) के लिए तय न्यूनतम मानकों को लागू करने हेतु व्यावहारिक और यथार्थवादी कार्ययोजना तैयार करने को कहा है।
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने स्पष्ट किया कि गहन देखभाल सेवाओं के संगठन और वितरण के लिए तैयार दिशानिर्देश लागू करने योग्य हैं और इन्हें तुरंत जमीन पर उतारा जाना चाहिए। कोर्ट ने राज्यों के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभागों को निर्देश दिया कि वे विशेषज्ञों के साथ बैठक कर ठोस योजना बनाएं।
अदालत ने शुरुआती चरण में मानव संसाधन, प्रशिक्षित स्टाफ, उपकरण, लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता देने को कहा है। साथ ही इन मानकों के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी के लिए स्पष्ट व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं।
कोर्ट ने कहा कि इस प्रक्रिया की शुरुआत तत्काल होनी चाहिए और पहली बैठक एक सप्ताह के भीतर आयोजित की जाए। तैयार रिपोर्ट स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को सौंपी जाएगी, जो इसे सभी राज्यों के साथ साझा करेगा। इसके बाद संयुक्त बैठक के जरिए अंतिम कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
साथ ही अदालत ने नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ के विशेष प्रशिक्षण पर भी जोर दिया है। इस संबंध में भारतीय नर्सिंग परिषद और पैरा मेडिकल परिषद को निर्देश दिया गया है कि वे आईसीयू प्रबंधन के लिए प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम को मजबूत करने की योजना पेश करें। मामले की अगली सुनवाई 18 मई को होगी।